> 12वीं में अगर आपने बाकी विषयों के साथ बायलॉजी चुनी है तो एमबीबीएस जैसे एलीट कोर्स के अलावा भी सैकड़ों दूसरे प्रोफेशनल कोर्स हैं जिनको करने के बाद आप मेडिकल फील्ड में अच्छा नाम और पैसा दोनों कमा सकते हैं.

12वीं में पीसीबी यानी फिजिक्स , केमिस्ट्री और बायलॉजी पढ़ने वालेज्या दातर छात्रों का सपना होता है डॉक्टर बनने का। और हो भी क्यों ना, सैलरी और सोशल स्टेट्स वाइज देश में डॉक्टर्स की बहुत वैल्यू है। ये एक ऐसा फील्ड है जो किसी भी हालात में जरूरी माना जाता है. देश की इकॉनोमी डाउन हो, रिसेशन हो या कोई महामारी जैसा संकट हो, हर तरह के फील्ड में स्लोडाउन आ सकता है लेकिन मेडिकल लाइन में नहीं.

मेडिकल फील्ड में वैसे तो कई कोर्स हैं लेकिन सबसे प्रोमिनेंट माना जाता है एमबीबीएस. इसके अलावा डेंटल सर्जरी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, नर्सिंग और बीफार्मा समेत कई ऐसे कोर्स हैं जो 12वीं के बाद किये जा सकते हैं. हालांकि बायलॉजी पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र एमबीबीएस की डिग्री लेने का सपना देखते हैं लेकिन लिमिटेड सीट होने के वजह से अगर एमबीबीएस में एडमिशन ना मिल पाये तो दूसरे कोर्सेज में एडमिशन लेकर भी शानदार करियर बना सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं 12वीं के बाद एमबीबीएस और दूसरे डिग्री कोर्सेस के बारे में.

एमबीबीएस

बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी यानी एमबीबीएस. मेडिकल फील्ड में सबसे ज्यादा वैल्यू इस कोर्स की है। इंडिया में डॉक्टर बनने की मिनिमम क्वालिफिकेशन एमबीबीएस है। एमबीबीएस 5 साल का कोर्स है और जिसको करने के बाद एमसीआई [मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया] में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद आप क्वालिफाइड डॉक्टर बन जाते हैं. देशभर के सभी सरकारी और प्राइवेट कॉलेज में एमबीबीएस करने के लिए नीट [नेशनल, ऐलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट] का एग्जाम पास करना होता है. नीट एक टफ कॉम्पटिटिव एग्जाम है और इसमें मिले नंबरों के आधार पर देशभर में करीब 80 हजार एमबीबीएस की सीटों पर एडमिशन मिलता है। देश के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज कम रिसर्च सेंटर एम्स की करीब 1200 सीटों के लिए एम्स एमबीबीएस का अलग एग्जाम होता है।

एमबीबीएस में 4 साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप करना जरुरी होता है. इस कोर्स के दौरान मेडिकल से जुड़े तमाम विषय जैसे सर्जरी, पीडियाट्रिशन, गायनकॉलोजी, मेडिसिन, डर्मटोलॉजी, अनाटॉमी, पैथॉलोजी, एनस्थीसियोलॉजी, फोरेंसिक मेडिसन जैसे विषयों को बहुत ही डिटेल में पढ़ाया जाता है। एमबीबीएस कोर्स के दौरान थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों की पढ़ाई काफी बड़े स्तर पर होती है और इसको काफी टफ माना जाता है.

करियर- एमबीबीएस की डिग्री के बाद आप देश में डॉक्टर बनने के योग्य बन जाते हैं। हालांकि एमबीबीएस करने वाले ज्यादातर छात्र आगे किसी एक सब्जेक्ट में स्पेशलाइज्ड बनने के लिए एमएस [मास्टर इन सर्जरी] या एमडी करते हैं. लेकिन अगर आप मास्टर डिग्री ना भी लेना चाहें तो एमबीबीएस के बाद बहुत सारे करियर ऑप्शन खुले हैं. आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर बन सकते हैं या फिर खुद अपनी प्रैक्टिस कर सकते हैं. एमबीबीएस एक बेहद ही एलीट कोर्स है। सरकारी कॉलेज में एमबीबीएस की फीस बहुत ज्यादा नहीं होती लेकिन प्राइवेट कॉलेज में इस कोर्स की फीस लाखों में होती है। इसीलिए जब कोई एमबीबीएस करता है तो डॉक्टर बनने के बाद उसकी सैलरी भी लाखों में होती है.

बीडीएस- बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी

एमबीबीएस के बाद छात्रों की दूसरी प्रेफरेंस होती है बीडीएस यानी बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी . ये कोर्स भी पांच साल का है जिसमें 4 साल पढ़ाई के अलावा एक साल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग करना जरूरी है. नीट का एग्जाम ही देशभर के सभी कॉलेज में बीडीएस कोर्स के लिए एलिजिबल टेस्ट है. डीसीआई [डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया] बीडीएस के कोर्स और पढ़ाई को रेगुलेट करती है. ये कोर्स करने के बाद सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल और दूसरे मेडिकल संस्थाओं में डेंटिस्ट बन सकते है। डेंटल डॉक्टर की सैलरी भी काफी अच्छी होती है।


बीएएमएस [बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन –एंड सर्जरी]

ये आयुर्वेद में एमबीबीएस के जैसी डिग्री है. ये कोर्स साढ़े पांच का होता है जिसमें एक साल की ट्रेनिंग करना जरूरी है. बीएएमएच में आयुर्वेद के बारे में पढ़ाई की जाती है और इस कोर्स को करने वाले डॉक्टर आयुर्वेद के तरीके से पेशेंट का इलाज करते हैं. नीट का एग्जाम ही इस कोर्स में एडमिशन का क्राइटेरिया है. इस कोर्स को करने के बाद आप किसी हॉस्पिटल में डॉक्टर बन सकते हैं या अपनी खुद प्रैक्टिस स्टार्ट कर सकते हैं.

बीएचएमएस- बैचलर ऑफ होम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी

बीएचएमएस होम्योपैथी की बैचलर डिग्री है और इस कोर्स को करने के बाद होम्योपैथी के डॉक्टर बनते हैं. अगर एमबीबीएस या दूसरे प्रिफरेंस वाले कोर्स में एडमिशन न हो पाये तो बीएचएमएस डिग्री भी ली जा सकती है. वैसे भी आजकल एलोपैथी के अलावा होम्योपैथी और आयुर्वेद के तरीके से ट्रीटमेंट लेने का चलन बढ़ा है ऐसे में इस कोर्स का भी अच्छा महत्व है. इस कोर्स को करने के लिए भी नीट का एग्जाम देना पड़ता है और इसके अलावा कुछ एक दूसरे एग्जाम भी है. साढ़े पांच साल के इस कोर्स में भी 1 साल की ट्रेनिंग जरूरी है. ज्यादातर सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में होम्योपैथी का डिपार्टमेंट होता है जहां आप नौकरी कर सकते हैं इसके अलावा अपना क्लिनिक भी खोल सकते हैं.

बीएनवाईएस- बैचलर ऑफ नैचुरोपैथी एंड योगा साइंस

ये 4.5 साल का कोर्स है जिसमें एक साल की इंटर्नशिप शामिल है. बीएनवाईएस में नेचुरल तरीके से कैसे मरीज को ठीक किया जाये इसके बारे में डिटेल में पढ़ाया जाता है। इसमें नेचुरल थेरेपी और तमाम योगा और आसन के बारे में पढ़ाया जाता है. इस कोर्स को करने के बाद फिटनेस ट्रेनर, योगा ट्रेनर बन सकते हैं या नेचुरोपैथी के डॉक्टर बन सकते हैं.

बीपीटी [बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी]

साढ़े चार साल के बीपीटी कोर्स में शरीर को फिट रखने वाली मसाज, एक्सरसाइज और मसल्स मूवमेंट से संबंधित पढ़ाई और प्रक्टिकल ट्रेनिंग करायी जाती है. फिजियोथेरेपी की आजकल के टाइम में डिमांड बढ़ रही है. हर बड़े सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में तो फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट होता ही है इसके अलावा लोग कई बार अपनी चोट या फिजिकल प्रोब्लम को दूर करने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट से पर्सनल थेरेपी भी लेते हैं। हर स्पोर्ट की टीम में भी फिजियोथेरेपिस्ट की जरूररत होती है.

बीवीएससी एंड एएच [बैचलर ऑफ वैटनरी साइंस एंड एनिमल हसबैंडरी]

बीवीएससी एंड एएच को करने के बाद वैटनरी डॉक्टर बनते हैं. ये कोर्स पांच साल का है और इसको करने के बाद डॉक्टर जानवरों का इलाज और सर्जरी करते हैं. आजकल पालतू जानवर रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लोग कुत्ता, बिल्ली, खरगोश से लेकर कई तरह की बर्ड्स भी पालते हैं और इसीलिए वैटनरी डॉक्टर्स की जरूररत भी बढ़ रही है. इसके अलावा लार्ज स्केल डेयरी, पॉल्ट्री फॉर्म वगैरा में भी वैटनरी डॉक्टर्स के करियर का स्कोप है

पैरामेडिकल कोर्स

हेल्थकेयर सेक्टर में डॉक्टर्स के अलावा पूरी एक टीम होती है जो उनके साथ जुड़ी रहती है और पेशेंट के इलाज में मदद करती है. ये टीम ही पैरामेडिकल टीम है जो ट्रीटमेंट के दौरान डॉक्टर्स के साथ असिस्टेंट का रोल प्ले करती है। इस फील्ड में डायग्नोसिस टेक्नोलॉजी, रेडियोलॉजी, , एनेस्थीसिया जैसे कई डिपार्टमेंट शामिल हैं. पैरामेडिकल के कई ऐसे सब्जेक्ट हैं जिनमे आप डिप्लोमा या डिग्री करने के बाद आसानी से हेल्थ केयर सेक्टर में जॉब पा सकते हैं.

डिप्लोमा इन नर्सिंग

प्रोफेशनल कोर्सेज में एक पॉपुलर डिप्लोमा नर्सिंग का है. वैसे तो नर्सिंग फील्ड में कोई भी जा सकता है लेकिन लड़कियां इस डिप्लोमा को ज्यादा प्रिफर करती है. मेडिकल फील्ड अब एक बड़ी इंडस्ट्री बन चुका है और देशभर में सरकारी अस्पतालों के अलावा बहुत सारे प्राइवेट हॉस्पटिल खुल गये हैं जहां नर्स की डिमांड रहती है। ऐसे में 12वीं के बाद तीन साल नर्सिंग डिप्लोमा भी आपको अच्छा करियर दे सकता है

बीफार्मा [बैचलर ऑफ फार्मेसी]

इंडिया में केमिस्ट बनने या मेडिकल स्टोर चलाने के लिए बीफार्मा जरूरी है। बीफार्मा करने के बाद आप लाइसेंस्ड फार्मेसिस्ट बन सकते हैं. बीफार्मा चार साल का कोर्स है और इसमें मुख्य तौर पर मेडिसिन, फार्मेसी, केमिस्ट्री, बायलॉजी  एंड हेल्थकेयर के बारे में पढ़ाया जाता है. इस डिग्री को करने के बाद आप चाहे तो नौकरी कर सकते हैं या मेडिकल स्टोर का अपना बिजनेस कर सकते हैं.

बीएससी [बैचलर ऑफ साइंस]

अगर आपका सेलेक्शन किसी स्पेशलाइज्ड कोर्स या डिप्लोमा में नहीं हो पाता या किसी वजह से आप प्रोफेशनल कोर्स नहीं कर पा रहे हैं तो आपके लिए बीएससी का ऑप्शन भी है। साइंस से जुड़े कई ऐसे सब्जेक्ट हैं जिनमें आप तीन साल की बीएससी करके ग्रेजुएट डिग्री ले सकते हैं और उसके बाद संबंधित फील्ड में मास्टर्स कर सकते हैं या फिर बीएससी के बाद उसी फील्ड में नौकरी कर सकते हैं। बीएससी  के लिए बहुत सब्जेक्ट का ऑप्शन है.

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