रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ़) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी किरिल दिमित्रेव ने कहा है कि रूस कोविड-19 के टीके ‘स्पुतनिक-5’ के उत्पादन के लिये भारत के साथ साझेदारी पर विचार कर रहा है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिमित्रेव ने कहा कि लातिन अमरीकी, एशिया और पश्चिम एशिया के कई देश टीके के उत्पादन में इच्छुक हैं.

उन्होंने कहा, “इस टीके का उत्पादन बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है और फ़िलहाल हम भारत के साथ साझेदारी की उम्मीद कर रहे हैं. ये कहना बेहद महत्वपूर्ण है कि टीके के उत्पादन के लिये होने वाली यह साझेदारियाँ हमें माँग को पूरा करने में सक्षम बनायेंगी.”

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में घोषणा की थी कि उनके देश ने कोविड-19 का दुनिया का पहला टीका बना लिया है जो ‘काफी प्रभावी’ तरीक़े से काम करता है और इस बीमारी के ख़िलाफ़ ‘स्थिर प्रतिरक्षा’ (इम्युनिटी) देता है.

‘स्पुतनिक-5’ का विकास गामालेया महामारी रोग और सुक्ष्मजीव विज्ञान शोध संस्थान और आरडीआईएफ़ मिलकर कर रहे हैं. हालांकि, इस टीके का तीसरे चरण का परीक्षण या बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षण (ह्यूमन ट्रायल) अभी नहीं हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, दिमित्रेव ने यह भी कहा कि रूस इस वक़्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उम्मीद कर रहा है.

धारा-370 हटने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की पहली बैठक

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला द्वारा उनके आवास पर बुलाई गई बैठक में बृहस्पतिवार को पार्टी के चार वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया.

द हिन्दू अख़बार के मुताबिक़, 5 अगस्त 2019 के बाद पार्टी की यह पहली बैठक थी.

इस मौक़े पर फ़ारूक़ अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ‘यह दुखद है कि हमने इस अवैध नज़रबंदी को कैसे सामान्य मान लिया.’

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बृहस्पतिवार को पार्टी के चार वरिष्ठ नेताओं को इस बैठक में शामिल होने की इजाज़त दी थी.

पार्टी के महासचिव अली मोहम्मद सागर और पूर्व मंत्री मोहम्मद शफ़ी उरी, अब्दुल रहीम राथर और नासिर सोगामी गुपकर रोड स्थित अब्दुल्ला के आवास पर बैठक के लिए पहुँचे.

दरअसल, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कुछ दिन पहले ही उच्च न्यायालय में पार्टी के उस दावे को ख़ारिज कर दिया था कि ‘उनकी पार्टी के कई नेता अब भी ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से घरों में नज़रबंद हैं.’ इसके मद्देनज़र ही यह बैठक बुलाई गई थी.

जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय को स्थानीय प्रशासन ने सूचित किया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के 16 नेताओं में से कोई भी हिरासत में नहीं है. इसके बाद पार्टी ने बुधवार को वरिष्ठ नेताओं की यह बैठक बुलाने का निर्णय लिया था.

पार्टी की बैठक में अब्दुल्ला ने कहा कि ‘एक बार सभी नेता आज़ाद हो जायें, तब हम साथ बैठेंगे और सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे. उम्मीद है कि यह बैठक जल्द होगी.’

अब्दुल्ला ने कहा कि वे पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती के लगातार संपर्क में हैं. उन्होंने कहा, “मैं महबूबा मुफ़्ती की इतनी लंबी नज़रबंदी को लेकर चिंतित हूँ. हम जम्मू-कश्मीर के अन्य सभी नेताओं की तरह उन्हें भी आज़ाद देखना चाहते हैं.”

पहली तिमाही में 20% घट सकती है भारत की जीडीपी: रिपोर्ट

दुनिया की नामी रेटिंग एजेंसी ‘केयर रेटिंग्स’ का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पिछले साल की तुलना में 20 फ़ीसदी की भारी गिरावट आ सकती है.

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, केयर रेटिंग्स ने कहा है कि पहली तिमाही की जीडीपी के आंकड़ों में कोविड-19 के आर्थिक दुष्प्रभाव दिख सकते हैं.

केयर रेटिंग ने बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन के प्रतिकूल प्रभावों के चलते पहली तिमाही में भारत की जीडीपी के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर अनिश्चितताएं कायम हैं.

केयर रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में क़रीब 19.9 फ़ीसदी की कमज़ोरी दिख सकती है. इस दौरान कृषि, वानिकी, मत्स्यपालन और लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में वृद्धि और बाकी क्षेत्रों में गिरावट आने की आशंका है.

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और उसकी रोकथाम के लिए मार्च से किये गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय अप्रैल-जून 2020-21 के जीडीपी के आंकड़े 31 अगस्त 2020 को जारी करने वाला है.

भारत के दस सबसे साफ़ शहरों में चार गुजरात से

स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 के नतीजों को लगभग सभी अख़बारों ने प्रकाशित किया है.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने लिखा है कि ‘इस वर्ष देश के दस सबसे साफ़ शहरों में चार शहर गुजरात के हैं.’

हालांकि, मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को लगातार चौथे साल ‘भारत का सबसे स्वच्छ शहर’ घोषित किया गया है.

सर्वेक्षण में इस बार दूसरा स्थान गुजरात के सूरत और तीसरा स्थान महाराष्ट्र के नवी मुंबई इलाक़े को मिला है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को ‘गंगा किनारे बसा सबसे अच्छा शहर’ घोषित किया गया है.

इस सूची में वाराणसी के बाद कानपुर, मुंगेर, प्रयागराज और हरिद्वार को रखा गया है.

सर्वेक्षण के मुताबिक़, 10 लाख से ज़्यादा आबादी वाले शीर्ष दस शहर- इंदौर, सूरत, नवी मुंबई, विजयवाड़ा, अहमदाबाद, राजकोट, भोपाल, चंडीगढ़, जीवीएमएस विशाखापत्तनम और वडोदरा हैं.

इनके अलावा लखनऊ को 12वां, गाजियाबाद को 19वां, प्रयागराज को 20वां, धनबाद को 33वां और फ़रीदाबाद को 38वां स्थान मिला है.

47 शहरों में पटना सबसे निचले पायदान पर है, जबकि चेन्नई को 45वां स्थान मिला है. मेरठ इस सूची में 41वें स्थान पर है और उसके बाद उत्तरी दिल्ली व कोटा हैं.

सरकार के अनुसार, इस साल कुल 4242 शहरों, 62 छावनी बोर्ड और गंगा किनारे बसे 97 शहरों का सर्वेक्षण किया गया.

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