मुंबई: निजी क्षेत्र के बंधन बैंक ने सोमवार को कहा कि पहले प्रवर्तकों की ऊंची शेयरधारिता के कारण उस पर लगाये गये प्रतिबंधों को रिजर्व बैंक ने पूरी तरह से वापस ले लिया है। रिजर्व बैंक ने करीब दो साल पहले बैंक पर ये प्रतिबंध लगाये थे। रिजर्व बैंक ने जो प्रतिबंध बैंक पर लगाये थे उनके तहत बैंक को अपने नेटवर्क विस्तार से पहले केन्द्रीय बैंक से मंजूरी लेने का कहा गया था।

इसके साथ ही बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्र शेखर घोष के मानदेय का भी एक स्तर पर ही रोक दिया गया था। इस माह की शुरुआत में बैंक की प्रवर्तक कंपनी बंधन फाइनेंसियल होल्डिंग्स ने 1.4 अरब डालर यानी 10,500 करोड़ रुपये के शेयर छूट पर बेचे। इससे बंधन बैंक में उसकी शेयरधारिता 20 प्रतिशत से अधिक घटकर 40 प्रतिशत रह गई।

यह केंद्रीय बैंक के नियमों को संतुष्ट करती है। रिजर्व बैंक ने सितंबर 2018 को ये प्रतिबंध बंधन बैंक पर लगाये थे। बैंक पर नई बैंक शाखा खोलने पर लगाये प्रतिबंध इस साल फरवरी में हटा लिया गया था। बंधन बैंक ने कहा है कि रिजर्व बैंक के 17 अगस्त 2020 के संदेश के साथ ही बैंक पर 19 सितंबर 2018 को लगाये गये सभी प्रतिबंध उठा लिये गये हैं।

बैंक ने इससे पहले एचडीएफसी की कम मूल्य वाले आवास रिण देने वाली कंपनी गृह फाइनेंस का विलय किया था। इससे बैंक में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से घटकर 60 प्रतिशत रह गई थी।

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