नई दिल्ली। देश की सेना और वायुसेना को बड़ी ही बेसब्री से इंतजार कर रही है वो Rafale Fighter Jet आने वाला है। इसके आने से ठीक पहले भारतीय वायुसेना ने इसे अपने बेड़े में शामिल करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। सबसे नए और आधुनिक लड़ाकू विमान राफेल को लेकर वायुसेना ने कहा है कि राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप फ्रांस से 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पहुंच जाएगी। आधिकारिक रूप से अगस्त के दूसरे हफ्ते में छह राफेल युद्धक विमानों को वायुसेना का हिस्सा बनाया जाएगा। इस बात की पुख्ता संभावना है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगे के साथ राफेल भारतीय वायुसेना के सबसे मारक जेट के रूप में उसके बेड़े का हिस्सा बन जाएगा।

वायुसेना के प्रवक्ता ने सोमवार को एक बयान में राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के इसी महीने के अंत तक भारत पहुंचने की घोषणा की गई है। प्रवक्ता के अनुसार, भारत पहुंचने के बाद 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पर मौसम के हिसाब से राफेल को वायुसेना में शामिल किया जाएगा। हालांकि राफेल के भारत पहुंचने के मौके को मीडिया कवरेज से दूर रखा गया है। राफेल विमानों की पहली खेप में छह जेट भारत आ रहे हैं। भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के तहत पूरी तरह से तैयार 36 राफेल जेट सितंबर 2022 तक आने हैं।

वायुसेना के अनुसार, भारत आने के बाद अगस्त के दूसरे हफ्ते में राफेल को IAF में विधिवत रूप से शामिल करने के कार्यक्रम की मीडिया कवरेज की इजाजत होगी। वायुसेना के पायलट और तकनीकी अधिकारी राफेल की उड़ान से लेकर संचालन में पूरी तरह प्रशिक्षित हो चुके हैं। वायुसेना इस बात की पूरी तैयारी कर रही है कि जल्द से राफेल को ऑपरेशनल मोर्चे पर लगाया जा सके।

LAC पर हालिया तनाव के बाद माना जा रहा है कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ मौजूदा तनाव के मद्देनजर राफेल के पहले बेड़े को सबसे पहले यहां तैनात किया जा सकता है। राफेल वायुसेना की मौजूदा ताकत में जबर्दस्त इजाफा करेगा क्योंकि पांचवी जेनरेशन के इस लड़ाकू जेट की मारक क्षमता जैसा लड़ाकू विमान चीन और पाकिस्तान के पास नहीं हैं।

वायुसेना के शीर्ष कमांडरों की 22-24 जुलाई को होने वाली कांफ्रेंस में भारत की मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा के साथ राफेल जेट की रणनीतिक तैनाती की चर्चा की संभावना है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और रक्षा सचिव कमांडर कांफ्रेंस के दौरान मौजूद रहेंगे जिसमें चीन ही नहीं पाकिस्तान सीमा के मौजूदा हालात को देखते हुए वायुसेना की ऑपरेशनल तैनाती की रणनीति पर गहन मंत्रणा होगी।

यह है खासियतें

यह विमान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के साथ ही स्काप्ल क्रूज मिसाइल भी युक्त है। इसके अलावा हवा से हवा में मार करने वाले युद्ध में हवा से हवा में हमला करने वाली बीवीआर मिसाइल भी होगी। इसके अलावा, भारत ने अपने यहां खरीदे राफेल में अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ बदलाव भी किए हैं। इसमें इजरायल के हेलमेट माउंट डिस्प्ले के साथ ही रडार वार्निंग रिसीवर, लो बैंड जामर, दस घंटे की फ्लाइट डाटा रिकार्डिंग और ट्रैकिंग सिस्टम समेत कई अन्य सुविधाएं हैं।

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