वॉशिंगटन: भारतीय मूल की अमेरिकी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस जीतने के बाद भारत के प्रति क्या रुख अपनाएंगी, ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन उनका अब तक का रिकॉर्ड नई दिल्ली के पक्ष में नहीं रहा है.

कमला हैरिस को मुख्य विपक्षी दल डेमोक्रेटिक ने अपना उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. उनकी उम्मीदवारी पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी हैरानी जाता चुके हैं. चूंकि कमला भारतीय मूल की हैं, इसलिए अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दिल में उनके प्रति सॉफ्ट कॉर्नर हो सकता है, लेकिन भारत सरकार की नीतियों को लेकर हैरिस ‘सॉफ्ट’ नहीं रही हैं.

कमला हैरिस ने कश्मीर मुद्दे से लेकर नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act-CAA) तक भारत विरोधी रुख अपनाया है. खासतौर पर वह नई दिल्ली की कश्मीर नीति की मुखर आलोचक रही हैं. पिछले साल जब हैरिस डेमोक्रेटिक नामांकन के लिए अभियान चला रही थीं, तब दो बार उनसे कश्मीर पर भारत के निर्णय के बारे में पूछा गया और दोनों ही बार उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग का समर्थन किया. इतना ही नहीं कमला हैरिस ने पिछले साल अक्टूबर में अपने के बयान में कहा था कि ‘हमें कश्मीरियों को याद दिलाना होगा कि वे दुनिया में अकेले नहीं हैं’. उनके इस बयान को पाकिस्तानी मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था.

भारत का विरोध, लेकिन पाक-चीन की करतूतों पर खामोशी

जब भारत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित किया, तो कुछ अमेरिकी सांसदों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और वे सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के भारतीय-अमेरिकी सांसद थे. जिसमें राजा कृष्णमूर्ति, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, अमी बेरा के साथ कमला हैरिस (Raja Krishnamoorthy, Pramila Jayapal, Ro Khanna, Ami Bera, Kamala Harris) का नाम भी शामिल है.

प्रमिला जयपाल ने तो दिसंबर में एक प्रस्ताव भी पेश किया था, जिसमें भारत से जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधों को समाप्त करने का आग्रह किया गया था. इसी के चलते भारतीय विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान जयपाल से मिलने से इनकार कर दिया. उन्होंने कश्मीर को लेकर जयपाल की समझ को ‘अनुचित’ करार दिया था. इसके बाद हैरिस जयपाल के समर्थन में कूद पड़ी थीं.

कमला हैरिस और प्रमिला जयपाल ने कश्मीर में मानवाधिकारों की जमकर दुहाई दी, लेकिन दोनों तब खामोश रहीं जब घाटी में आतंकी हमलों में निर्दोष भारतीय मारे गए. दोनों ने पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ होने वाले अत्याचार और लद्दाख में चीनी सैनिकों की हिंसक करतूतों पर भी मुंह नहीं खोला.

फायदे के लिए ‘भारतीय’ का नारा

हालांकि, कमला और प्रमिला दोनों ही अपने फायदे के लिए खुद को भारतीय के रूप में प्रोजेक्ट करने से कभी पीछे नहीं हटीं. उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुने जाने के बाद से कमला बार-बार यह साबित करने में लगी हैं कि उनका भारत से बहुत पुराना नाता है, ताकि भारतीय-अमेरिकियों के वोट हासिल किये जा सकें. उनकी बहन माया हैरिस ने अपनी मां श्यामला हैरिस से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया है, जो कई सालों पहले चेन्नई से अमेरिका चली गई थीं. माया हैरिस ने इस वीडियो के साथ भारतीयों को लुभाने वाला संदेश भी लिखा है.

उनकी पोस्ट कहती है, ‘आप कमला हैरिस की मां के बारे में जाने बिना उन्हें नहीं जान सकते. हम जानते हैं कि आज हमारी मां के पूर्वज मुस्कुरा रहे होंगे’.

कमला हैरिस वोट की खातिर भारत को लेकर बड़ी-बड़ी बातें जरूर कर रही हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड नई दिल्ली के खिलाफ ही रहा है. ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि अगर वह जीतती हैं तो उनका भारत के प्रति नजरिया कैसा रहता है?

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