नई दिल्‍ली: देश में कोरोना (Corona) के मरीजों की तादाद में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में सिर्फ सोशल डिस्‍टेंसिंग (Social Distancing) का पालन करके ही इस महामारी से बचा जा सकता है। करीब 5 महीने से वैज्ञानिक इस महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए वैक्‍सीन बनाने में लगे हुए हैं, जिसके बाद एक अच्‍छी खबर सामने आई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) वैक्‍सीन (Vaccine) बनाने के काफी करीब पहुंच गई है और इसके लिए वह भारत (India) के साथ एक करार भी करने जा रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जिस वैक्सीन पर काम रही है, उसकी सप्लाई के लिए ब्रिटिश स्वीडिश फार्मास्युटिकल कंपनी आस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) भारत की एक कंपनी के साथ करार करने जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, आस्ट्राजेनेका वैक्सीन की सप्लाइ के लिए पुणे स्थित सेरम इंस्टिट्यूट के साथ लाइंसेंस करार करने वाली है। ये दोनों मिलकर 1 अरब वैक्सीन भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में पहुंचाएंगे। इनमें से 40 करोड़ (40 crore) वैक्सीन की 2020 के अंत तक सप्लाइ करने का लक्ष्य है।

एसआईआई (SII) के सीईओ के मुताबिक, ‘हम इस वैक्सीन को भारत के साथ-साथ दूसरे छोटी आय वाले देशों में पहुंचाने के लिए एस्ट्राज़ेनेका के साथ साझेदारी करके खुश हैं। पिछले 50 सालों में SII ने विश्व स्तर पर वैक्सीन निर्माण और आपूर्ति में महत्वपूर्ण क्षमता बनाई है।’

कोरोना की वैक्सीन बनाने की रेस में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सटी सबसे आगे है। यहां वैक्सीन का ट्रायल दूसरे फेज में पहुंच गया है। वहीं पुणे स्थित एसआईआई यहां विकसित होने वाली वैक्सीन के साथ काम कर रही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने कुछ दिनों पहले ही दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल की घोषणा की थी, जिसमें 10,000 लोगों को शामिल किया जाएगा। वहीं ब्राजील ने ऑक्सफोर्ट की इस वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दे दी है।

पुणे स्थित एसआईआई यूके की ऑक्सफोर्ड, अमेरिका के कोडेजेनिक्स और ऑस्ट्रेलिया की बायोटेक फर्म थेमिस के साथ कोरोन की वैक्सीन पर काम कर रही है। इसके अलावा SII अपनी खुद की भी विकसित कर रहा है।

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