कोरोना वैक्सीन पर छिड़ी है दुनिया भर में होड़

पिछड़े और गरीब देशों के लिए है सबसे ज्यादा मुसीबत

दुनिया भर में कोरोना वायरस की वैक्सीन पर ट्रायल चल रहा है। विश्व के कई देशों ने दावा किया है कि वह वैक्सीन के ट्रायल में काफी आगे निकल चुके हैं और जल्द उन्हें सफलता मिलेगी, तो कुछ देशों में अभी भी वैज्ञानिक दिनरात खोज में लगे हैं। बड़ा सवाल यह है कि अगर वैक्सीन आ भी जाती है तो यह आम जनता तक पहुंचेगी कैसे। इसी सवाल का जवाब हमने खोजने की कोशिश की है।

दुनिया भर में डेढ़ करोड़ से ज्यादा संक्रमण के मामले हैं और छह लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

बात भारत की करें तो यहां पर 12 लाख से ज्यादा केस हो चुके हैं। संक्रमितों की संख्या अब 24 घंटे में करीब 50 हजार तक पहुंचने वाली है। ऐसे में वैक्सीन का आना और लोगों तक पहुंचना बेहद पेचीदा काम है।

वैक्सीन पर क्या है देशों की राय

वैक्सीन पर रिसर्च और कई चरणों का ट्रायल पार करने वाले देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता उनके देश के नागरिक हैं। अमेरिका ने पहले ही कहा है कि अगर वैक्सीन बनती है तो सबसे पहले वह अमेरिकी नागरिकों को दी जाएगी। रूस ने भी अप्रत्यक्ष तौर पर कहा है कि पहले वह अपने देश के नागरिकों को वैक्सीन देंगे, उसके बाद अन्य किसी को।

गरीब और पिछड़े देशों के लिए होगी मुसीबत

एक्सपर्ट ने इस नीति को ‘वैक्सीन नैशनलिस्म’ या ‘वैक्सीन राष्ट्रवाद’ करार दिया है। उनका मानना है कि विकसित देश जितनी तेजी से रिसर्च और ट्रायल कर रहे हैं, इस परिस्थिति में उन्हें सफलता जरूर मिलेगी, लेकिन उन देशों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत होगी जो गरीब हैं या फिर संसाधन का आभाव है।

भारत को रहना होगा हर परिस्थिति के लिए तैयार

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर एनके गांगुली कहते हैं कि भारत को भी पूरी तरह निश्चिन्त नहीं बैठना चाहिए एनके गांगुली का कहना है कि भारत में ट्रायल और रिसर्च चल रहे हैं, लेकिन हो सकता है कि हमारे यहां उस क्वालिटी की वैक्सीन न बने। इस परिस्थिति में भारत को किसी अन्य देश से मदद मिलती है या नहीं यह बड़ी बात होगी। इसलिए हमें अभी से तैयारी करनी पड़ेगी क्योंकि जहां वैक्सीन होगी, हो सकता है वो दूसरे देशों के लिए उपलब्ध न हो।

डब्ल्यूएचओ ने भी जाहिर की है चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि अगर वैक्सीन के मुद्दे पर दुनिया भर में एक राय नहीं बनी तो सबसे ज्यादा नुकसान उन देशों का होगा, जिन्हें वैक्सीन बनाने में सफलता नहीं मिली। ऐसे देशों में हालात बेहद खराब हो जाएंगे जहां पैसे और शक्ति दोनों नहीं है। इसलिए वैक्सीन पर दुनिया के शक्तिशाली देशों को एक साथ आकर सोचना पड़ेगा।

बड़ा सवाल.. किसे मिलेगी पहले वैक्सीन

कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनिया भर में होड़ मची है। पर समझने वाली बात यह है कि वैक्सीन आने के बाद यह महामारी रातोरात नहीं ठीक होगी। इसके लिए लोगों तक सही समय पर इसे पहुंचना बेहद जरूरी है। माना जा रहा है कि वैक्सीन बनने के बाद सबसे पहले इसे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को दिया जाएगा। यह उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है, जिन पर कोरोना वायरस का खतरा सबसे ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूरोपियन यूनियन ऐसे विकल्प भी ढूंढ रहे हैं जिससे पेटेंट लाइसेंसिंग का एक बैंक बना कर वैक्सीन सभी देशों को दे दी जाए। हालांकि अभी इस तरह के किसी मसौदे पर सहमति बनती नहीं दिखी है लेकिन ये शायद सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

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