महिला हो या पुरुष आज के समय हर किसी की जिंदगी में तनाव का होना एक आम समस्या हो गया है. चाहे बच्चे हो या बड़े हर व्यक्ति किसी न किसी तरह की चिंता से हमेशा घिरा ही रहता है. (Be it women or men, stress has become a common problem in everyone’s life today. Everyone, whether children or older, is always surrounded by some kind of anxiety).

कुछ हद तक तनाव होना स्वाभाविक भी है. लेकिन जब यही तनाव बढ़ने लगता है तो इससे व्यक्ति को एंग्जायटी और अवसाद व अन्य कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. (It is natural to have some degree of tension. But when this tension starts increasing, then one has to face anxiety and depression and many other serious problems).

इतना ही नहीं अगर तनाव अधिक हो जाए तो इससे बाहर निकल पाना भी व्यक्ति के लिए काफी मुश्किल हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए और प्रोफेशनल हेल्प की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया जाए. (Not only this, if the tension gets high then it becomes very difficult for the person to get out of it. Therefore, it is important to identify it in time and control the situation with the help of professional help).

आमतौर पर शरीर में तनाव का स्तर बढ़ जाने से यह समस्याएं होने लगती है जैसे- 

सिर व दांत दर्द (Head & Toothache) – 

जब व्यक्ति को ज्यादा तनाव होता है तो उसे लगातार सिर दर्द व जबड़े में दर्द और अकड़न का एहसास अक्सर होता है. दरअसल डिप्रेशन में व्यक्ति अक्सर अपने दांत को पिसता है. जिसके कारण उसे दांतों में दर्द व अकड़न की समस्या होती है. (When a person is highly stressed, he often feels headache and jaw pain and stiffness. Actually in depression a person often grinds his teeth. Due to which he has problems in teeth pain and stiffness).

मांसपेशियों में कमजोरी (Muscle Weakness) – 

तनाव के कारण व्यक्ति के शरीर में अक्सर कंपन होती है. यहां तक कि उसके होठ व हाथ भी कापते हैं. इसके अलावा मांसपेशियों में ऐंठन, गर्दन में दर्द और पीठ दर्द की समस्या भी होती है. तनाव के कारण व्यक्ति को चक्कर आना, हल्का सिर दर्द और बेहोश भी हो सकती है. (The person’s body often vibrates due to stress. Even his lips and hands tremble. Apart from this, there are also problems of muscle spasms, neck pain and back pain. Stress can cause a person to feel dizzy, lightheaded and even unconscious).

त्वचा से जुड़ी समस्याएं (Skin Problems) – 

जी हां, तनाव का बढ़ता स्तर त्वचा संबंधी समस्याओं को ही उत्पन्न करता है. दरअसल, तनाव के कारण व्यक्ति को बार-बार पसीना आता है या फिर उसके हाथ- पैर बार-बार ठंडे हो जाते हैं. जिसकी वजह से त्वचा पर चकत्ते, दाने, खुजली, मुंहासे व अन्य एलर्जी होने लगती है. (Yes, increased levels of stress cause skin problems. Actually, due to stress, a person sweats frequently or his hands and feet become cold again and again. Due to which skin rashes, rash, itching, pimples and other allergies start).

पेट से जुड़ी समस्या (Stomach Problem) – 

तनाव को हार्टबर्न, कब्ज, पेट दर्द व मतली का कारण भी माना जाता है. इसके कारण व्यक्ति को पेट फूलना, दस्त आदि समस्याएं भी हो सकती है. इसलिए अगर आपको इस तरह की समस्याएं लगातार बनी रहे तो आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. (Stress is also believed to cause heartburn, constipation, abdominal pain and nausea. Due to this the person may also have problems with flatulence, diarrhea etc. So if you continue to have such problems, then you should not ignore them).

क्रॉनिक दर्द (Chronic Pain) – 

शरीर में तनाव का स्तर बढ़ जाने पर अक्सर लोगों को कई तरह के दर्द की शिकायत होती है. एक अध्ययन के अनुसार स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर पुराने दर्द से जुड़ा हुआ हो सकता है. इसलिए शरीर में तनाव का स्तर बढ़ने पर व्यक्ति को पुराना दर्द फिर से उभर सकता है. वैसे तनाव के अतिरिक्त उम्र बढ़ने, चोट पहुचना व नर्वस डैमेज के कारण भी व्यक्ति को क्रॉनिक दर्द की समस्या हो सकती है. (People often complain of many types of pain when the level of stress in the body increases. According to a study, increased levels of the stress hormone cortisol may be associated with chronic pain. Therefore, when the stress level in the body increases, the chronic pain can reappear. In addition to stress, a person may have chronic pain problems due to aging, injury and nervous damage).

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