राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह से शुरू हुआ राजनीतिक उठापटक का दौर जारी है.

सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत पर एसओजी ने दो एफआईआर दर्ज की है.

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा लगाये गए आरोपों का जवाब दिया है.

उन्होंने कहा है, “मैं किसी भी जाँच का सामना करने को तैयार हूँ. ऑडियो टेप में मेरी आवाज़ नहीं है.”

इससे पहले रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया के ज़रिये सामने आये कुछ ऑडियो टेप्स का हवाला देते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत पर आरोप लगाया था कि वे कुछ बाग़ी विधायकों की मदद से राजस्थान की सरकार गिराने का प्रयास कर रहे हैं.

शुक्रवार सुबह हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सुरजेवाला ने कहा, “मीडिया के ज़रिये कुछ ऑडियो टेप सामने आये हैं. कथित तौर पर इनमें बाग़ी कांग्रेस नेताओं और एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के बीच बातचीत सुनाई देती है. इससे साफ़ होता है कि पैसे का आदान-प्रदान हो रहा है.”

सुरजेवाला ने वायरल ऑडियो टेप के हवाले से बीजेपी नेता व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, बीजेपी नेता संजय जैन और कांग्रेस विधायक भंवर लाल शर्मा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार करने की माँग की है.

उन्होंने कहा कि ‘बातचीत सुनकर स्पष्ट होता है कि तीनों मिलकर राजस्थान सरकार गिराने का प्रयास कर रहे थे.’

हालांकि सुरजेवाला ने कहा कि “ऑडियो टेप की सत्यता क्या है और ये टेप कितने पुराने हैं, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) इसकी जाँच करेगा.”

सुरजेवाला ने कहा, “इस बात की जाँच होनी चाहिए कि विधायकों को ख़रीदने के लिए काला धन कहाँ से आया.”

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सुरजेवाला ने कांग्रेस के भीतर हुई इस बग़ावत के नेतृत्वकर्ता सचिन पायलट से कहा कि “वे सामने आयें और सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि ख़रीद-फ़रोख्त के लिए विधायकों की लिस्ट बीजेपी को उन्होंने दी थी या नहीं.”

सुरजेवाला ने बताया कि बाग़ी विधायक भंवर लाल और विश्वेंद्र सिंह की जाँच पूरी होने तक, कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी गई है. दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है.

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बैठे कांग्रेस नेता चेतन डूडी ने कहा कि उन्हें प्रलोभन देने की कोशिश की गई और उन्हें यह इसलिए बताना पड़ रहा है क्योंकि वायरल हुए ऑडियो टेप में उनका भी नाम सुनाई देता है.

राजस्थान हाई कोर्ट सचिन पायलट और अन्य बागी कांग्रेस विधायकों की याचिका पर शुक्रवार दोपहर एक बजे सुनवाई करेगा. बागी खेमे ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी किये गए अयोग्यता नोटिसों को अदालत में चुनौती दी है.

बीते 24 घंटों में जो-जो हुआ

  • राजस्थान के नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे सिंधिया पर सीधे आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि ‘राजस्थान में जो हो रहा है, वो गहलोत-वसुंधरा गठजोड़ का नतीजा है.’ अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बेनीवाल ने लिखा है, “पूर्व सीएम वसुंधरा राजे अशोक गहलोत की अल्पमत वाली सरकार को बचाने का पुरज़ोर प्रयास कर रही हैं. राजे द्वारा कांग्रेस के कई विधायकों को इस बारे में फ़ोन भी किये गए. वसुंधरा ने कांग्रेस में अपने क़रीबी और सीकर-नागौर ज़िले के 1-1 जाट विधायक को फ़ोन करके सचिन पायलट से दूरी बनाने को कहा. प्रदेश व देश की जनता वसुंधरा-गहलोत के आंतरिक गठजोड़ की कहानी समझ चुकी है.”
  • सचिन पायलट की तरफ से गुरुवार को राजस्थान हाई कोर्ट में पेश हुए वकील हरीश साल्वे ने विधानसभा स्पीकर की तरफ से विधायकों को जारी नोटिस को असंवैधानिक बताया और इसे निरस्त करने की माँग की. लेकिन गहलोत खेमे का कहना है कि ‘हाईकोर्ट स्पीकर को नहीं रोक पाएगा क्योंकि ख़ुद पार्टी छोड़ने पर भी दलबदल विरोधी क़ानून लागू होता है.’
  • राजस्थान में सोशल मीडिया पर तीन ऑडियो क्लिप बहुत शेयर किये जा रहे हैं. इन्हें बाग़ी कांग्रेस विधायकों की कॉल रिकॉर्डिंग बताया जा रहा है. साथ ही दावा किया जा रहा है कि ‘गहलोत सरकार को गिराने के लिए ये विधायक पैसे की डील कर रहे थे.’ इनमें से एक ऑडियो विधायक भंवर लाल शर्मा का बताया जा रहा है. लेकिन भंवर लाल ने वायरल हो रहे ऑडियो क्लिप को फ़र्ज़ी बताया है.
  • भारतीय ट्राइबल पार्टी के उपाध्यक्ष परेश भाई वसावा ने कहा है कि “बीटीपी जनता के फ़ैसले का सम्मान करती है, वो चुनी हुई सरकार को नहीं गिराना चाहती, बीटीपी के दो विधायक हैं, दोनों कांग्रेस को सपोर्ट करेंगे.” पहले पार्टी का रुख स्पष्ट नहीं था कि वो किसे समर्थन करने वाली है.

सीटों का गणित – किसके पास कितने विधायक?

पायलट की बग़ावत के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास सरकार चलाने के लिए बहुमत तो है, मगर कुछ लोगों के हेरफेर से ही उनकी सरकार मुसीबत में आ सकती है.

गहलोत समर्थकों का दावा है कि ‘उनकी टीम में 106 विधायक हैं’ जो राजस्थान में बहुमत के लिए ज़रूरी नंबर 101 से पाँच अधिक हैं. राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं.

पायलट खेमे ने सोमवार को मुख्यमंत्री गहलोत को 106 विधायकों के समर्थन वाली बात पर शंका ज़ाहिर की थी.

उन्होंने कहा था, ‘यदि उनके पास 106 विधायक हैं तो उनके पास संख्याबल है. ऐसे में उन्हें विधायकों को एक होटल में बंद करके रखने की क्या ज़रूरत है?’

बहरहाल, मंगलवार को हुई बैठक में अशोक गहलोत के समर्थकों की संख्या 102 रही थी.

कांग्रेस के पास अब तक 122 विधायकों का समर्थन था, इनमें 107 कांग्रेसी और 15 निर्दलीय विधायक थे. लेकिन सचिन पायलट की बग़ावत से ये गणित बिगड़ गया.

बताया गया कि राजस्थान सरकार के दो कैबिनेट मंत्री – विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा दिल्ली में बैठकर सचिन की जीत पर दाँव लगा रहे थे. दोनों नेताओं पर कांग्रेस पार्टी ने कार्रवाई की है.

बीते एक सप्ताह में जो टूट हुई है, उसके बाद अशोक गहलोत के पास 102 विधायकों का स्पष्ट समर्थन हो सकता है जिनमें 90 कांग्रेसी, 7 निर्दलीय और 5 छोटी पार्टियों के विधायक शामिल हैं.

यहाँ ये छोटी पार्टियाँ हैं – सीपीएम, बीटीपी और आरएलडी. पर भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) की भूमिका यहाँ अचानक से बड़ी हो गई है.

सोमवार को बीटीपी ने कहा था कि उसके विधायक न्यूट्रल रहें यानी वे स्पष्ट ना करें कि वो सचिन की तरह हैं या गहलोत की तरफ. लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी ने कहा कि बीटीपी के दोनों विधायक सरकार के साथ हैं.

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