महामारी का खौफ लोगों को दिल का रोगी बना रहा है। अमेरिकी वैज्ञानिकों के अध्ययन से पता लगा कि संक्रमण से खुद को बचाने में सफल रहे लोग अब ब्रोकन हार्ट सिन्ड्रोम की जद में आ रहे हैं। यह सिन्ड्रोम लोगों में हार्ट अटैक जैसा खतरा पैदा करता है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि इस संकटकाल में लोग अपनों से शारीरिक दूरी तो अपनाएं पर मन की बात करते रहें।

अमेरिका के शैक्षिक चिकित्सा केंद्र क्लीवलैंड क्लीनिक का यह अध्ययन मेडिकल एसोसिएशन ऑफ अमेरिका के जर्नल में छपा है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि महामारी के बाद ब्रोकन हार्ट सिन्ड्रोम का खतरा स्वस्थ लोगों में दोगुना हो गया है। शोधदल ने ओहियो प्रांत के अस्पतालों में भर्ती हृदय संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों का अध्ययन किया।

जिसके परिणामों की तुलना पिछले दो साल में आए समान शारीरिक समस्याओं वाले मरीजों से की। जिससे उन्होंने पाया कि महामारी
के दौरान आए मरीजों में यह सिन्ड्रोम होने का खतरा पूर्व के मरीजों से दोगुना अधिक है।

तनाव से पैदा होता है ब्रोकन हार्ट सिन्ड्रोम

तनाव के कारण हृदय की मांसपेशियों में ताकोत्सुबो सिंड्रोम या ब्रोकन हार्ट सिन्ड्रोम की स्थिति पैदा होती है। जिसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और सीने में दर्द और सांस की तकलीफ होने लगती है। यह दिल के दौरे जैसा ही है लेकिन यह तनावपूर्ण घटनाओं के कारण होता है और दौरा रक्तप्रवाह में रुकावट से आता है। दुर्लभ मामलों में यह जानलेवा हो सकता है लेकिन आमतौर पर मरीज कुछ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं।

महामारी के बाद दोगुने हुए मरीज

शोधदल ने अमेरिकी प्रांत ओहियो में पांच जिलों के 1914 मरीजों पर मार्च से अप्रैल तक अध्ययन किया जो कि महामारी का शुरूआती समय था। साथ ही इस अवधि में अस्पताल में भर्ती हुए 250 मरीजों के नमूने लिए। ये सभी मरीज हृदयरोगों से पीड़ित थे। इस डाटा का अध्ययन महामारी से पहले दो साल तक आए मरीजों से किया गया। जिसमें पाया कि संक्रमित मरीजों में सिन्ड्रोम का खतरा दो गुना अधिक है।

सामाजिक-आर्थिक असर से तनाव –

वैज्ञानिकों ने पाया कि सिन्ड्रोम विकसित होने के लिए जरूरी तनाव महामारी से पैदा हो रहा है। जिसके मनोवैज्ञानिक, सामाजिक व आर्थिक कारण हैं। सामाजिक दूरी के नियम, एकांतवास, लॉकडाउन, इसके आर्थिक असर और सामाजिक संवाद घटने से लोग बेहद तनाव में हैं।

बात करें –अग्रणी शोधार्थी डॉ. अंकुर कालरा कहते हैं कि बहुत तेजी से गैर-कोविड मौतें बढ़ रही हैं, हमने पाया कि महामारी का डर लोगों को अकेला कर रहा है। हम चाहते हैं कि लोग आपसी संवाद न छोड़ें।

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