सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों से कोरोना मरीजों के इलाज और अस्पतालों पर निगरानी संबंधी उसके निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, हालांकि केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दायर किया है, लेकिन उसमें आदेशों के अनुपालन का विवरण नहीं है।

पीठ ने कहा, निर्देशों का पालन करने के लिए सिर्फ निर्देश देना पर्याप्त नहीं है। निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों को रिकॉर्ड पर लाने की जरूरत है। कोर्ट ने सभी राज्यों से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। पीठ ने कहा, हमारा मानना है कि राज्यों के मुख्य सचिवों को 19 जून, 2020 को इस अदालत द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन के लिए प्रयास करना होगा।

पीठ ने राज्यों को उचित अनुपालन रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा है। गत 19 जून को कोरोना मरीजों के उचित इलाज के लिए कई अन्य निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि पीठ ने सभी राज्यों को डॉक्टरों और विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। जो कोरोना अस्पताल में मरीजों के इलाज पर गौर करेगी और जरूरी निर्देश देगी।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 टेस्ट व सुविधाओं के लिए एक मुनासिब दर तय कर सकती है, जिसे सभी को मानना होगा। मालूम हो कि दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों का इलाज सही तरीके से न होने और शवों के साथ अमर्यादित व्यवहार होने संबंधी मीडिया रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।

पश्चिम बंगाल में दोबारा बढ़े संक्रमण के मामले पश्चिम बंगाल में कोरोना-मुक्त होने के बाद एक स्वास्थ्य कर्मचारी के दोबारा संक्रमित होने की घटना ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच, राज्य में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जलपाईगुड़ी जिले में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात 45 साल के कर्मचारी को बीते महीने संक्रमण हुआ था इलाज और होम क्वारंटीन के बाद वह ठीक हो गया था।

लेकिन अब वह एक बार फिर से संक्रमित हो गया है। इलाके में स्वास्थ्य विभाग के अफसर आन स्पेशल ड्यूटी सुशांत राय ने बताया कि अब उत्तर बंगाल में दोबारा संक्रमित होने के तीन और मामले सामने आए हैं। राय ने बताया कि वह व्यक्ति पांच जून को संक्रमित होने की वजह से अस्पताल में भर्ती हुआ था।

15 जून को रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे छोड़ दिया गया। लेकिन अब 24 जुलाई को लक्षण सामने आने पर उसकी दोबारा जांच हुई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यह आश्चर्यजनक है। इसकी वजहों की जांच की जा रही है। पश्चिम बंगाल में अब तक आठ लाख से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच की जा चुकी हैं।

लेकिन इनमें पॉजिटिव लोगों की बढ़ती दर ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि स्वस्थ होने वाले मरीजों की दर बेहतर होने के बावजूद पॉजिटिव होने वाले लोगों की दर बढ़ना चिंता का विषय है। जून के आखिर में यह आंकड़ा 4.95 प्रतिशत था जो अब बढ़ कर 7.29 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अब तक 8.05 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।

कोविड-19 से मुकाबले के लिए शीघ्र बकाया चुकाए केंद्र सरकार : ममता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोविड-19 से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केंद्र सरकार से तमाम बकाया रकम का भुगतान करने की मांग की है। सोमवार को पश्चिम बंगाल, नोएडा और उत्तर प्रदेश में कोरोना की जांच के लिए नए केंद्रों के उद्घाटन के लिए आयोजित आनलाइन कार्यक्रम के दौरान ममता ने कोविड-19 से निपटने के लिए एक नया कोष स्थापित करने की भी मांग की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आपदा राहत कोष की रकम का इस्तेमाल अम्फान तूफान के बाद पुनर्वास के लिए किया जा रहा है। केंद्र को बंगाल की बकाया करीब 53 हजार करोड़ की रकम का तुरंत भुगतान कर देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर आपदा कोष की रकम तूफान के बाद पुनर्वास में ही खर्च हो गई तो कोरोना का मुकाबला कैसे किया जाएगा? प्रधानमंत्री को महामारी से निपटने के लिए एक अलग कोष की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए।

ओडिशा में कोवैक्सिन टीके का मानव ट्रायल शुरू कोरोना वायरस टीका कोवैक्सिन का ओडिशा में मानव ट्रायल शुरू हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक आईसीएमआर द्वारा चयनित 12 केंद्रों पर यह परीक्षण शुरू हुआ है जिसमें इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और एसयूएम अस्पताल शामिल है। भारत बायोटेक ने इस टीके को तैयार किया है।

परीक्षण के प्रधान वैज्ञानिक ई वेंकट राव ने बताया कि जिन लोगों को टीके की खुराक दी गई हैं सभी पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन्हें 14 दिन के अंतर में टीके की दो खुराक दी जाएंगी। कोवैक्सिन भारत में बना कोरोना का पहला टीका है। आईसीएमआर और भारत बायोटेक मिलकर इसके प्रीक्लीनिकल व क्लीनिकल विकास पर काम कर रहे हैं।

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