प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक लेह यात्रा चीन से निपटने की उनकी चार सूत्रीय योजना का हिस्सा है। उन्होंने चीन के खिलाफ कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पहले ही खोले हुए हैं। शुक्रवार सुबह की लद्दाख यात्रा से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यदि चीन वार्ता के जरिए नहीं मानता है, तो भारत दूसरे सभी उपलब्ध विकल्पों को अपनाने से नहीं हिचकेगा। 
विदेश मामलों के जानकारों के मुताबिक, पीएम मोदी की लद्दाख यात्रा उचित समय पर उचित कदम है। इससे न सिर्फ सेनाओं का मनोबल बढ़ा है, बल्कि चीन को भी सख्त संदेश मिलेगा। एलएसी पर भारत दबाव में तो नहीं ही आएगा। जरूरत पड़ी तो भारत की सेना चीन के आगे मजबूती से खड़ी होगी। 

पिछले कुछ समय में भारत ने लद्दाख में सैन्य उपस्थिति और सुदृढ़ की है।

गलवां घाटी और पैंगोंग झील इलाकों में चीनी सेना के निर्माण पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच तीन वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन चीन हटने को तैयार नहीं है। इसी दौरान संघर्ष में भारत के 20 सैनिकों के शहीद होने से मामला और बिगड़ गया।

जल्द मिलेगी मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं, 1962 की तरह रूस तटस्थ नहीं है। ऐसे तनाव में भी रूस ने भारत को जल्द से जल्द मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 की आपूर्ति की बात कही है। फ्रांस राफेल की खेप जल्द से जल्द देना सुनिश्चित कर रहा है। जापान, जर्मनी, अमेरिका इस तनाव के लिए सीधे चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। भारत को घेरने वाला नेपाल घरेलू मोर्चे पर खुद बुरी तरह उलझ गया है।

गेंद चीन के पाले में डाली… 

मोदी की यात्रा से क्या हासिल होगा? दौरे के साथ, भारत ने विवाद सुलझाने की गेंद चीन के पाले में डाल दी है। वह भी इस संदेश के साथ कि भारत रत्तीभर भी पीछे नहीं हटेगा। यदि चीन नहीं माना तो भारत की आक्रामक मुहिम और बढ़ेगी।

मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम… 

खुद घरेलू मोर्चे पर आर्थिक सहित कई चुनौतियों से दो-चार चीन युद्ध नहीं कर सकता। यदि वह लद्दाख सीमा पर उग्रता दिखाता है तो हम मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं। सैनिकों का हौसला बढ़ाने में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा बड़ा कदम साबित होगी।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाया था हांगकांग मुद्दा 

दूसरे देशों से बातचीत कर चीन की आक्रामकता के खिलाफ एक वैश्विक माहौल बनाया जा रहा है। इन्हीं प्रयासों की वजह से रूस भारत के साथ आ खड़ा हुआ, तो फ्रांस ने भी चीन के आक्रामक स्वभाव की कड़ी आलोचना की है। रही-सही कसर हांगकांग में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चीन द्वारा की जा रही कड़ी कार्रवाई का मामला भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र में उठाकर पूरी कर दी गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here