– गलवान घाटी को बफर जोन बनाया गया ताकि आगे फिर से कोई हिंसक घटना न हो

– चीन से एक बार धोखा खाकर 20 जवानों की शहादत देने वाली भारतीय सेना सतर्क

नई दिल्ली, 06 जुलाई । आखिर भारत का दबाव काम आया और ड्रैगन ने गलवान घाटी के तनाव वाले इलाके से अपने सैनिकों को 2 किलोमीटर पीछे हटा लिया है। 15 जून को इसी जगह खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीनी सैनिकों ने गलवान, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से भी अपने कैंप पीछे हटाए हैं। चीनी के भारी बख्तरबंद वाहन अभी भी गलवान नदी क्षेत्र में गहराई वाले क्षेत्रों में मौजूद हैं। हालांकि अभी इस बारे में सेना का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसीलिए एक बार धोखा खा चुकी भारतीय सेना बहुत सतर्कता से नजर रख रही है।

गलवान घाटी को अब बफर जोन बना दिया गया है ताकि आगे फिर से कोई हिंसक घटना न हो।

सूत्रों के मुताबिक चीनी सेना ने उन स्थानों से 1-2 किलोमीटर की दूरी पर टेंट, वाहनों और सैनिकों को हटा दिया है, जहां कोर कमांडर स्तर की वार्ता में असहमति पर सहमति व्यक्त की गई थी। वार्ता में यह भी तय किया गया था कि दोनों देश 72 घंटे तक एक-दूसरे पर नजर रखेंगे कि विवादित क्षेत्रों से पीछे हटने के लिए जमीन पर क्या कदम उठाए गए हैं। हालांकि रविवार शाम तक पूर्वी लद्दाख में जमीन पर कोई डी-एस्केलेशन नहीं था, लेकिन सोमवार से कुछ आगे बढ़ने की उम्मीद जताई गई थी। सबसे पहले गलवान घाटी और हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र से ही चीनी सेना के पीछे जाने की उम्मीद थी। इसी के तहत आज सुबह चीनी सैनिकों के गलवान, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से अपने कैंप पीछे हटाने की खबर मिल रही है लेकिन सेना की ओर से इस बावत कोई पुष्टि नहीं की गई है।

इसी बीच भारत के चौतरफा दबाव के आगे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से हटने को मजबूर हुए चीन ने कहा है कि भारत से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी कम करने की दिशा में प्रगति हुई है और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान गलवान घाटी से पीछे हटे हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने कहा है कि चीन और भारतीय सेना के बीच कमांडर स्तर की 6 जून, 22 जून और 29 जून को हुई पिछली वार्ता में बनी सहमति के आधार पर तनाव को घटाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सीमा पर तैनात सैन्य कर्मी तनाव करने कम करने और झड़प से बचने को लेकर उचित कदम उठा रहे हैं जिनमें प्रगति देखने को मिली है और चीनी सेना 15 जून को हुई झड़प के स्थान से 2 किलोमीटर पीछे हटी है। चीन के विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पेइचिंग ने भारत के चौतरफा दबाव के आगे झुकते हुए गलवान घाटी में संघर्ष वाली जगह से 2 किलोमीटर अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया है।

इसी बीच रविवार को चीन के साथ सीमा विवाद पर बने मेकैनिज़्म के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच वीडियो कॉल से बातचीत हुई थी । ​दोनों के बीच भविष्य में गलवान घाटी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए बातचीत हुई ताकि आगे इस तरह की विकट स्थिति पैदा न हो।

लद्दाख की पूर्वी सीमा पर भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडर 6 जून को पहली बार आमने-सामने बैठे। चीन के मोलदो क्षेत्र में हुई इस बैठक के बाद लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने सेना मुख्यालय को भारत-चीन वार्ता से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने अपने चीनी समकक्ष दक्षिण शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन से स्पष्ट रूप से पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे, गलवान घाटी, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में ‘फिंगर-4 से फिंगर 8’ क्षेत्र से कब्ज़ा हटाकर अप्रैल, 2020 की यथास्थिति बहाल करने को कहा था। हालांकि वार्ता के दौरान चीनी सेना पीएलए ने भी भारत की फीडर सड़कों और पुलों के निर्माण का कड़ा विरोध किया, जिस पर भारतीय पक्ष ने कहा कि चीनी घुसपैठ को खाली किया जाए और भारत सीमा पर अपने निर्माणों को नहीं रोकेगा। कुल मिलाकर दोनों देशों के बीच 2-2 किलोमीटर हटने की बात तय हुई थी।

इस वार्ता में हुई सहमति जब जमीन पर नहीं उतरीं तो 15 जून को भारत-चीन के ब्रिगेडियर और कर्नल स्तर की वार्ता हुई जिसमें भी चीन ने गलवान घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 से टेंट हटाने पर सहमति जताई। दिन में बैठक करने के बाद देर शाम चीनी सैनिक फिर वादे से मुकर गए और टेंट लगा दिए। इसी मुद्दे पर भारतीय सैनिक विरोध दर्ज कराते हुए पेट्रोलिंग पॉइंट 14 पर चीनी जवानों को पीछे धकेल रहे थे। उसी दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इसी बीच चीन के सैनिकों ने अचानक लोहे की रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए। इस घटना के बाद 22 जून को कमांडर स्तर की दूसरे दौर की 11 घंटे तक हुई वार्ता में भारत ने चीन से दो टूक कहा कि पहले लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से अपने सेना हटाकर 2 मई से पहले की स्थिति बहाल करें, तभी आगे की बातचीत संभव है। भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच तीसरे दौर की वार्ता 29 जून को 12 घंटे हुई जिसमें चीन गलवान जैसी झड़प नहीं दोहराने पर सहमत हुआ। यह भी तय हुआ कि दोनों पक्ष चरणबद्ध तरीकों से सीमावर्ती क्षेत्रों से सैनिकों को हटाएंगे और बैठक में बनी सहमतियों पर दोनों देश 72 घंटों तक एक-दूसरे पर नजर रखेंगे।

तीसरे दौर की वार्ता में बनी सहमतियों के बावजूद चीन ने विवादित क्षेत्रों से पीछे हटना नहीं शुरू किया। इस बीच कूटनीतिक प्रयासों के तहत दो बार दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की वार्ता भी हुई। 3 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के साथ लेह में सिन्धु नदी के तट पर 11,000 फीट की ऊंचाई पर सेना की पोस्ट नीमू पर पहुंचे और सेना के जवानों से बातचीत की। यहां से राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ड्रैगन को एक निर्णायक और दृढ़ संदेश भेजा गया। इस तरह देखा जाए तो सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक दबावों के चलते चीन पस्त हो गया और आज तीसरे दौर की वार्ता में बनी सहमतियों के अनुसार विवादित क्षेत्रों से पीछे हटना पड़ा।

भारत की ओर से अभी पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 और 15, गलवान घाटी, हॉट स्प्रिंग्स और फिंगर क्षेत्र सहित सभी चार विवादित क्षेत्रों से चीनी सैनिकों के हटने की निगरानी की जा रही है क्योंकि विभिन्न स्थानों पर निकासी की सीमा अलग-अलग है। लद्दाख में चीनी सैनिकों का पीछे हटना शुरू हो गया है जो पिछले 48 घंटों में गहन कूटनीतिक, सैन्य जुड़ाव और संपर्कों का परिणाम है।

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