भारत के बाद अमेरिका ने भी चीनी कंपनियों को बड़ा झटका दे दिया है। सोमवार को केन्द्र सरकार द्वारा 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के पश्चात अब अमेरिका के टेलीकॉम रेगुलेटर ने हुवावे व ZTE के उत्पादों पर जासूसी करने के आरोप में बैन लगा दिया है।

बताया इन कंपनियों को खतरनाक
अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन ने मंगलवार को 5-0 की वोटिंग के आधार पर इन कंपनियों को खतरनाक बताया। अमेरिकी सरकार ने इन कंपनियों से करार भी किया हुआ था, इसमें 8.3 बिलियन डॉलर का सामान खरीदना था, लेकिन अब इस पर भी रोक लग गई है।

FCC के अध्यक्ष अजीत पाई ने बोला कि इस निर्णय के बाद Huawei व ZTE, ये दोनों ही टेलीकॉम कंपनियां $8.3 बिलियन के यूनिवर्सल सर्विस फंड का प्रयोग नहीं कर पाएंगी। बता दें कि FCC के इस फंड का प्रयोग इन कंपनियां द्वारा सप्लाई किए जाने वाले उपकरणों व ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर किया जाना था।

उन्होंने ट्विटर पर एक पत्र भी शेयर किया जिसमें सबूतों के आधार पर ब्यूरो ने हुवावे व ZTE को अमेरिका के कम्युनिकेशन नेटवर्क व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। अमेरिका का बोलना है कि हुवावे के इक्विपमेंट को चाइना जासूसी करने के लिए प्रयोग कर सकता है।

इन कंपनियों पर भी लग सकती है रोक
इसके अतिरिक्त तीन चीनी टेलीकॉम कंपनियों पर भी जल्द रोक लग सकती है। पिछले वर्ष अमेरिकी मार्केट में एंट्री को लेकर चाइना मोबाइल लिमिटेड पर प्रतिबंधित लगाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष मई में एक आदेश पारित किया था। जिसके अनुसार, जो भी कंपनी देश की सुरक्षा के लिए खतरा है उनके साथ किसी तरह की टेलिकम्युनिकेशन का कारोबार नहीं किया जाएगा।

एफसीसी के कमिश्नर जेफ्री स्टार्क्स ने मंगलवार को एक बयान में बोला कि “अविश्वसनीय इक्विपमेंट” कई स्थान पर लगे हैं व एफसीसी को रिप्लेसमेंट कार्यक्रम चलाने के लिए बोला गया है। पाई ने 24 जून को कांग्रेस पार्टी को पूर्ण पैमाने पर रिप-एंड-रिप्लेस कार्यक्रम के रूप में 2 बिलियन डॉलर का खर्च बताया है।

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