बीजिंग: चीन के प्रमुख शोध संस्थान में करीब 90 परमाणु वैज्ञानिकों के इस्तीफे देने से संकट की स्थिति बन गई है. इसके बाद सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने मामले को प्रतिभा पलायन यानी ‘ब्रेन ड्रेन’ करार देते हुए जांच के आदेश दिए हैं. इस्तीफे की वजह जो भी हो लेकिन अब दुनिया जानना चाहती है कि ऐसा क्या हुआ होगा जिसके चलते इतने बड़े पैमाने पर वैज्ञानकों ने काम करने से मना कर दिया.

माना जा रहा है कि इन चीनी वैज्ञानिकों के हाथ कुछ अहम जानकारियां लगीं जिसके बाद उन्होंने एक साथ इस्तीफा देने का फैसला किया.

इसके बाद से ही चीन के हेफी शहर में स्थित द साइंटिस्ट ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी सेफ्टी टेक्नोलॉजी (INEST) दुनियाभर में सुर्खियों में है.

हेफी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस चीन के सर्वोच्च सरकारी शोध संस्थान का हिस्सा है जिसे चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के नाम से जाना जाता है. INEST चीन के उन महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक है जो अब तक 200 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले चुका है. यहां करीब 600 लोग काम करते हैं जिनमें 80 फीसदी शोधकर्ता पीएचडी (डिग्री) धारक हैं. पिछले साल यही संस्थान एक वर्चुअल न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने को लेकर चर्चा में था, जिसका मकसद ऐसे केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाना था.

इसके बाद इन प्रतिभाशाली लोगों को अपने संस्थान से जुड़ी अहम जानकारी मिलीं. जून में INEST में काम करने वाले लोगों का अपनी ही पैरेंटिंग संस्था से विवाद हुआ. खबरों के मुताबिक उनके केंद्र पर नियंत्रण के अधिकार को लेकर झगड़ा शुरू हुआ था.

सूत्रों के मुताबिक INEST फंड की कमी के चलते बड़े प्रोजेक्ट हासिल नहीं कर पा रहा था, वहीं शोधकर्ताओं पर प्राइवेट कंपनियों की भी नजर थी. चीन के वाइस प्रीमियर ‘लियू ही’ ने व्यापक इस्तीफों की जांच के आदेश दिए हैं.

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 500 में से 90 लोगों ने इस्तीफा दिया है और पिछले साल तो ये आंकड़ा 200 था इसालिए अब कयास लगाए जा रहे हैं कि अब ये संस्थान सिर्फ 100 शोधकर्ताओं के कंधों पर टिका है.

चीन का ये शोध संस्थान कई सरकारी यूनिवर्सिटी और शोध संस्थानों से जुड़ा है, जहां बहुत सारी चुनौतियों के बीच काम करना आसान नहीं है. दरअसल ये सीधे तौर पर बीजिंग यानी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में है.

सरकारी संस्थानों की नौकरी में स्थायित्व और बेहतर सुविधाओं का वादा किया जाता है लेकिन जब काम में फ्री हैंड नहीं मिलता और सुविधाओं के अभाव में लगातार उपेक्षा और दबाव बढ़ता है तभी ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को प्राइवेट सेक्टर की तरफ जाना पड़ता है. चीन के सरकारी संस्थानों से वहां की बौद्धिक संपदा की दिलचस्पी लगातार कम हो रही है यानी प्रतिभा का ऐसा पलायन चीन के लिए बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है.

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